सहूलियत के नाम पर प्रदूषण व बीमारियां

सहूलियत के नाम पर प्रदूषण व बीमारियां

सहूलियत के नाम पर प्रदूषण व बीमारियां

आजमगढ़  / आधुनिकीकरण की तरफ हम तेजी से जरूर बढ़ रहे हैं लेकिन तमाम कारक भी हमारे सामने आ रहे हैं। अब आधुनिकीकरण किसानों की खेती किसानी तक भी पहुंच चुका है। ऐसे में धान की कटाई भी कंबाइन मशीन से की जा रही है। इसके बाद किसान खेत में ही धान के डंठल को जला दे रहे हैं। इससे जहां धुएं की वजह से वातावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं हमारे खेती किसानी में सहायक कीट आदि मर रहे हैं। मिट्टी के आवश्यक तत्व भी नष्ट हो रहे हैं। इसके अलावा प्रदूषण से तमाम प्रकार की बीमारियों के लोग शिकार हो रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी उमेश गुप्ता ने बताया कि धान के डंठल जलाने से धुएं आसमान में घुलते हैं। इसकी वजह से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ जाता है। हालत यह होती है कि लोग तमाम बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। दमा व सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डंठलों के जलाने पर धान को प्रभावित करने वाले कीट भी जहां नष्ट होते हैं वहीं किसानों का सहायक केचुए आदि भी मरते हैं।
पराली जलाने से आसमान में धुंध सा दिख रहा है। इसकी वजह से सांस लेना जहां मुश्किल हो रहा है वहीं लोग तमाम बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा पराली मोहम्मदपुर, गंभीरपुर, लालगंज, देवगांव, रानी की सराय आदि क्षेत्रों में जलाई जाती है। विभिन्न क्षेत्रों में यह कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है लेकिन महकमा अंजान बना हुआ है। अभी तक किसी भी किसान पर अर्थदंड नहीं लगाया गया है
इस तरह लगता है अर्थदंड
-दो एकड़ तक जलाने पर 2500
-दो से पांच तक एकड़ जलाने पर 5000
-पांच एकड़ से ऊपर तक जलाने पर 15000
अभी तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो तहसील से संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर छापेमारी की जाएगी और दोषी लोगों पर अर्थदंड लगाया जाएगा।

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