हड़ताली रेजीडेंट डाक्टर आईसीयू के बाद इमरजेंसी ड्यूटी से भी अलग हुए, संकट बढ़ा

हड़ताली रेजीडेंट डाक्टर आईसीयू के बाद इमरजेंसी ड्यूटी से भी अलग हुए, संकट बढ़ा

हड़ताली रेजीडेंट डाक्टर आईसीयू के बाद इमरजेंसी ड्यूटी से भी अलग हुए, संकट बढ़ा

बीएचयू के हड़ताली रेजीडेंट डॉक्टरों ने रविवार से खुद को इमरजेंसी सेवा से भी अलग कर लिया। इसके बाद इमरजेंसी में नए मरीजों की भर्ती बंद कर दी गयी। शनिवार को आईसीयू से भी डॉक्टर हट गये। हड़ताल के कारण पिछले छह दिनों से ओपीडी एक तरह से ठप पड़ी है। इस दौरान विश्वविद्यालय और अस्पताल प्रशासन की हड़ताल खत्म करने की अपील कई बार खारिज कर चुके हैं। रेजीडेंट यहां एम्स सरीखी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। आईसीयू में हुए विवाद के बाद अस्पताल परिसर में ही पिछले सोमवार को कुछ युवकों ने एक रेजिडेंट डाक्टर को पीट दिया था। हमलावरों की गिरफ्तारी समेत कई मांगों लेकर डाक्टर हड़ताल पर चले गए थे। तीन हमलावरों की तो गिरफ्तारी हो गई लेकिन अन्य मांगों को भी मानने का डाक्टर दबाव बना रहे हैं। बीएचयू प्रशासन हड़ताल समाप्त कराने में पूरी तरह विफल रहा है। रेजीडेंट डाक्टरों से कई बार वार्ता हुई लेकिन बेनतीजा रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति भी बनाई है। सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया। मगर रेजीडेंट विश्वविद्यालय की ओर से की गई कार्रवाई को पर्याप्त नहीं मानते हैं।
पिछले तीन दिनों से सीनियर कंसल्टेंट भी खुद को मरीजों की सेवा कर पाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। आईसीयू के बाद अब इमरजेंसी से भी रेजीडेंट डॉक्टरों के हट जाने से संकट और गंभीर हो गया है। मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
रेजीडेंट डॉक्टरों का कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर वे हड़ताल पर हैं, उनपर बीएचयू प्रशासन का रवैया काफी लचर है। उनके साथ मारपीट करने वालों के प्रति ही सहानुभूति का रवैया अपनाया गया है। रेजीडेंट डॉक्टरों का आरोप है किसी दवाब में चिकित्सा अधीक्षक और पुलिस प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। विवेचनाधिकारी ने एसएसपी से कह दिया कि हम लोग मेडिकल नहीं करना चाहते हैं। यह सरासर गलत है। आरोपित हम लोगों के पास मेडिकल के लिए आए ही नहीं थे। एफआईआर में लिख दिया गया है कि घटना परिसर के बाहर हुई थी। जबकि ऐसा नहीं है। बीएचयू को एम्स जैसा माना जा रहा है लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है। इसलिए वह हड़ताल जारी रखने पर मजबूर हैं।

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